हिन्दू धर्म रक्षा को लागि आफ्नो पुरा परिवार बलिदान गर्नु हुने गुरु गोविंद सिंह को याद मा शहीदी सप्ताह- मनाऔं

यो सप्ताह जुन चलि रहेछ यानि पौष ५ गते देखि पौष १२ गते (20 दिसम्बर देखि 27 दिसम्बर सम्म) यही 7 दिन मा गुरु गोबिंद सिंह ज्यूको पूरा परिवार शहीद हुनु भएको थियो

एक ज़माना था जब भारत के पंजाब में इस हफ्ते सब लोग ज़मीन पे सोते थे क्योंकि माता गूजरी ने वो रात दोनों छोटे साहिबजादों के साथ, नवाब वजीर खां की गिरफ्त में सरहिन्द के किले में ठंडी बुर्ज में गुजारी थी।

ये सप्ताह भारत के इतिहास में शोक का सप्ताह होता है।

गुरु गोबिंद सिंह जी की कुर्बानियों को इस मुल्क ने सिर्फ 300 साल में भुला दिया… जो कौमें अपना इतिहास, अपनी कुर्बानियाँ भूल जाती हैं वो खुद इतिहास बन जाती है।

आओ, आपको क़ुरबानी की एक ऐसी मिसाल से अवगत करवाते हैं जो दुनियां में शायद ही कहीं मिले:

21 दिसंबर:
श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने परिवार सहित श्री आनंद पुर साहिब का किला छोड़ा।

22 दिसंबर:
गुरु साहिब अपने दोनों बड़े पुत्रों सहित चमकौर के मैदान में पहुंचे और गुरु साहिब की माता और छोटे दोनों साहिबजादों को गंगू नामक व्यक्ति जो कभी गुरु घर का रसोइया था उन्हें अपने साथ अपने घर ले आया।
चमकौर की जंग शुरू हुई और दुश्मनों से जूझते हुए गुरु साहिब के बड़े साहिबजादे श्री अजीत सिंह उम्र महज 17 वर्ष और छोटे साहिबजादे श्री जुझार सिंह की उम्र महज 14 वर्ष थी। अपने 11 अन्य साथियों सहित मजहब और मुल्क की रक्षा के लिए वीरगति को प्राप्त हुए।

23 दिसंबर :
गुरु साहिब की माता श्री गुजर कौर जी और दोनों छोटे साहिबजादे गंगू के द्वारा गहने एवं अन्य सामान चोरी करने के उपरांत तीनों को मुखबरी कर मोरिंडा के चौधरी गनी खान और मनी खान के हाथों ग्रिफ्तार करवा दिया गया और गुरु साहिब को अन्य साथियों की बात मानते हुए चमकौर छोड़ना पड़ा।

24 दिसंबर :
तीनों को सरहिंद पहुंचाया गया और वहां ठंडे बुर्ज में नजरबंद किया गया।

25 और 26 दिसंबर:
छोटे साहिबजादों को नवाब वजीर खान की अदालत में पेश किया गया और उन्हें धर्म परिवर्तन करने के लिए लालच दिया गया।

27 दिसंबर:
साहिबजादा जोरावर सिंह उम्र महज 8 वर्ष और साहिबजादा फतेह सिंह उम्र महज 6 वर्ष को तमाम जुल्म ओ जब्र उपरांत जिंदा दीवार में चीनने उपरांत गला रेत कर शहीद किया गया और खबर सुनते ही माता गुजर कौर ने अपने साँस त्याग दिए।

क़ुरबानी की इस अनोखी और शायद दुनिया की इकलौती मिसाल को इस शहीदी सप्ताह के माध्यम से समाज को सिख धर्म की बुनियाद का पता चल सके ऐसा एक प्रयास है।

आज के हर बच्चे को इस जानकारी से अवगत करवाना हमारा दायित्व है।

🪷🪷।। शुभ वंदन ।।🪷🪷

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By Hardinath Saptahik

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