हम बदलेंगे, तो बदलाव आएगा।🙏
(आज की कहानी) *तृप्ति की चमक* 👌👌🙏👌👌 मांजी बहुत तेज बारिश हो रही है आप खिड़की बंद कर दीजिए बारिश की बूंदे आपको बीमार कर सकती हैं। प्रिशा अपनी सास मिथलेश जी से बोली। नहीं बहू !! बूंदे यहां नहीं आ रही। तुम्हारे बाबूजी को बहुत पसंद थी बारिश। घंटो बैठे रहते थे खिड़की पर हम दोनों। साथ में चलता था पकोड़े और चाय का दौर। सच क्या दिन थे वो भी अब तो ना उनका साथ रहा ना पकोड़े झेलने वाला जिस्म! मिथलेश जी ठंडी आह भरकर बोली। प्रिशा ने पकोडों की बात होने पर मिथलेश जी की आंखों…