श्री मिथिला बिहारी बहुउद्देशीय आर्गेनिक कृषि फार्म

🌺सत्संग के फूल🌺

💐|| श्री हरि: ||💐 🌺सत्संग के फूल🌺 भगवान् ने केवल कल्याण के लिये मनुष्य शरीर दिया है | इसकी प्राप्ति के लिये तत्परता से लग जाना चाहिये |संसार का काम तो चलता रहेगा, रुकेगा नहीं | विशेष चेत करना चाहिये | परमात्मप्राप्ति वर्तमान का विषय है | इसमें समय का व्यवधान नहीं है | जैसे अन्न, जल, औषध खुद को ही लेना पड़ता है, ऐसे ही कल्याण भी खुद को करना है | भगवत्प्राप्ति की लगन लग जाय – ‘नारायन’ हरि लगन में, यह पाँचों न सुहात |विषय-भोग, निद्रा, हँसी, जगत-प्रीति बहुबात || भगवान् संसार के दुःख की परवाह नहीं…
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विद्वान और विद्यावावान में क्या फर्क है ?

विद्यावान गुनी अति चातुर।राम काज करिबे को आतुर॥ एक होता है विद्वान और एक विद्यावान । दोनों में आपस में बहुत अन्तर है। इसे हम ऐसे समझ सकते हैं, रावण विद्वान है और हनुमान जी विद्यावान हैं। रावण के दस सिर हैं । चार वेद और छह: शास्त्र दोनों मिलाकर दस हैं । इन्हीं को दस सिर कहा गया है जिसके सिर में ये दसों भरे हों, वही दस शीश हैं । रावण वास्तव में विद्वान है । लेकिन विडम्बना क्या है ?रावण सीता जी का हरण करके ले आया ।कईं बार विद्वान लोग अपनी विद्वता के कारण दूसरों को…
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